
एम्स में पत्रकार की एंट्री पर रोक: गार्ड ने कहा - "आप पत्रकार हैं, इसलिए अंदर नहीं जा सकते"
पटना l राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में सोमवार शाम एक पत्रकार को परिसर में प्रवेश से रोकने का मामला सामने आया है। पत्रकार अपनी निजी आवश्यकता से एम्स पहुँचे थे, लेकिन प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सिर्फ इसलिए अंदर जाने से रोक दिया क्योंकि उनकी बाइक पर "प्रेस" लिखा हुआ था।
जैसे ही गेट पर खड़े गार्ड ने प्रेस लिखा वाहन देखा, उन्होंने पत्रकार को रोकते हुए कहा, "आप पत्रकार हैं, आपको अंदर जाने के लिए अनुमति लेनी होगी।" जब पत्रकार ने स्पष्ट किया कि वह न तो रिपोर्टिंग कर रहे हैं और न ही किसी नियम का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि किसी मरीज से मिलने जा रहे हैं, तब भी उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।
गार्ड का कहना था कि यदि वाहन पर "प्रेस" लिखा हो, तो विशेष अनुमति अनिवार्य है। पत्रकार द्वारा तर्क दिए जाने के बावजूद गार्ड और वहां मौजूद सुपरवाइज़र ने कथित तौर पर दुर्व्यवहार करते हुए प्रवेश से इनकार कर दिया।
New 18 के पत्रकार अमरजीत शर्मा समेत कई लोग ऐसे जिनके बाईक में प्रेस लिखा था, उन्हें एम्स के मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया, एम्स परिसर में भी नहीं जाने दिया गया, पत्रकार ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी एम्स के निदेशक को फोन पर दी, लेकिन संस्थान की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। अंततः पत्रकार को निराश होकर लौटना पड़ा। इस तरह की घटनाएं अकेली नहीं हैं। वरिष्ठ पत्रकार अमरजीत शर्मा ने बताया कि उन्हें भी मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया और स्पष्ट कहा गया कि पत्रकारों के लिए एम्स परिसर में प्रवेश पूर्णतः वर्जित है। बाद में पता चला कई सोमवार कई प्रेस लिखा वाहन और पत्रकार को एम्स के मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया, एम्स परिसर में भी जाने नहीं दिया गया l
शर्मा ने सवाल उठाया कि यदि किसी मरीज को दिखाने के लिए एम्स लाना पड़े, तो भी केवल "प्रेस" लिखा वाहन देखकर गेट पर ही रोक दिया जाएगा? उन्होंने कहा, "अगर एम्स में पारदर्शिता है, तो इस तरह की रोक क्यों?"
पत्रकारों का मानना है कि यह घटना मीडिया की स्वतंत्रता और सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि कोई पत्रकार निजी कार्यवश या सूचना प्राप्त करने के लिए किसी सार्वजनिक संस्थान में प्रवेश करता है, तो उसे सिर्फ उसके पेशे के आधार पर रोकना न केवल अनुचित है, बल्कि असंवैधानिक भी हो सकता है। लेकिन सोमवार को मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया प्रेस लिखा देख, अगर अस्पताल के अंदर खबर बनाता या मरीज के इलाज में वाधक बनता तो रोका जा सकता था, लेकिन सम्पूर्ण रोक सही नहीं है, इस मामले में पत्रकार यूनियन पीएमओ, राष्ट्रपति, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, सूबे के मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखूंगा l
इस पूरे मामले में अब तक एम्स प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
एम्स निदेशक प्रो. (डॉ.) सौरभ वार्ष्णेय से फ़ोन पर बात किया तो जांच करने की बात कही है।