
दिल्ली में महिलाओं की कॉन्फ्रेंस, वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 का विरोध
नई दिल्ली (टीएचटी)। ऑल इंडिया मुस्लिम महिला एसोसिएशन (ए.आई.एम.डब्ल्यू.ए.) की ओर से वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के विरोध में नई दिल्ली स्थित इंडिया इस्लामिक सांस्कृतिक केंद्र में महिलाओं की एक अहम सम्मेलन आयोजित की गई। इस सम्मेलन की अध्यक्षता पूर्व सांसद एवं भारतीय मुसलमान नागरिक अधिकार अध्यक्ष जनाब मोहम्मद अदीब ने की, जबकि इसकी सरपरस्ती आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना उबैदुल्लाह खान आज़मी ने की।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही। मुख्य अतिथियों में राज्यसभा सांसद फौज़िया खान, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एस.डी.पी.आई.) उपाध्यक्ष मोहम्मद शफी, प्रोफेसर एस.वी.के. त्रिपाठी (सामाजिक कार्यकर्ता), मौलाना काज़ी वसी अहमद क़ासमी (नायाब काज़ी, इमारत-ए-शरिया बिहार, उड़ीसा, झारखंड), डॉक्टर असमा ज़हरा (अध्यक्ष ए.आई.एम.डब्ल्यू.ए.) और दिवंगत अहमद पटेल की पुत्री सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए।
मोहम्मद अदीब ने महिलाओं की बड़ी भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह आंदोलन उन्हें शाहीन बाग़ के आंदोलन की याद दिलाता है। उन्होंने वक्फ संशोधन अधिनियम को मुस्लिम समाज के लिए “सबसे बड़ा अन्याय” बताया और कहा कि अगर इस पर चुप्पी साधी गई तो आने वाला समय बहुत कठिन होगा।
डॉ. असमा ज़हरा ने कहा कि वक्फ की परंपरा इस्लाम के प्रारंभिक दौर से चली आ रही है और यह इंसानियत की सेवा का माध्यम है। उन्होंने बताया कि देशभर की मुस्लिम महिलाएं इस अधिनियम का विरोध कर रही हैं और इसे वापस लेने की मांग कर रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वक्फ का संरक्षण समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, मस्जिदों, ईदगाहों और कब्रिस्तानों के लिए आवश्यक है।
सांसद फौज़िया खान ने कहा कि इस अधिनियम के चलते वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा। महिलाओं की शिक्षा और समाज सुधार में भूमिका अहम है, इसलिए इस लड़ाई में उनका योगदान अनिवार्य है।
सलमान खुर्शीद ने बताया कि वक्फ संरक्षण से जुड़े मामले उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं और उम्मीद है कि मुस्लिम समुदाय को राहत मिलेगी।
अन्य वक्ताओं ने कहा कि यह कानून सामुदायिक अधिकारों पर सीधा हमला है और इसके खिलाफ देशभर में जागरूकता फैलाने की ज़रूरत है।
कार्यक्रम का संचालन मुस्लिम महिला संघ की पदाधिकारियों ने किया। श्रीमती ज़ीनत महताब (उपाध्यक्ष, ए.आई.एम.डब्ल्यू.ए. दिल्ली) ने उद्देश्य रखा, जबकि मम्दूहा माजिद (संयोजक) और अन्य ने कहा कि यह महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी है, जो वक्फ की सुरक्षा और संरक्षण के लिए उनके संकल्प को दर्शाता है।