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नरकटियागंज की स्वास्थ्य व्यवस्था एम्बुलेंस के बजाए ठेले पर
www.todayhindtimes.com 9 May 147 views THT SPECIAL

नरकटियागंज की स्वास्थ्य व्यवस्था एम्बुलेंस के बजाए ठेले पर

  • एम्बुलेंस नहीं मिलने पर ठेले पर मरीज को लाद अस्पताल पहुंचे

टीएचटी रिपोर्टर नरकटियागंज। कोरोना के वैष्विक महामारी में एक से बढ़ एक ह्दय विदारक दृष्य देखने को मिला। यह ह्दय विदारक दृष्य ने हर लोगों के अंदर एक डर से बन गया है। जिंदगी बचाने के लिए इंसान क्या नहीं करते। यहां तो यह स्थिति बनी हुई है कि शव को लेजाने के लिए भी कोई सही व्यवस्था नहीं। कहीं कोई साइकिल से तो कहीं ठेला पर तो कई घिसेट कर तो कहीं कचड़े वाले वाहन में डाल कर अंतिम संस्कार के लिए ले जा रहे हैं। लेकिन इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। सांसद, विधायक व मंत्री बन जाने के बाद जनता का सेवा का कहा इच्छा रहता है। चुनाव जीत जाने के बाद वहीं जनता से लोग छुआछूत मानने लगते हैं। बदहाली स्वास्थ्य सुविधा को लेकर लोक सड़क पर और अस्पताल के दरवाजे पर तड़प कर मर रहे हैं। ऐसा ही दृष्य है नरकटियागंज अनुमंडल अस्पताल का।


नरकटियागंज अनुमण्डल क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था एम्बुलेंस से उतार कर ठेला से लाया गया। यह पढ़ने और सुनने में ले भी आपको अटपटा सा लग रहा हो, लेकिन यह बिल्कुल हकिकत है। यहां की चरमरा चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है इसलिए मरीज और उनके परिजन जान बचाने के लिए अब एम्बुलेंस के बजाए ठेले पर अस्पताल लेकर पहुंच रहे हैं। जानकारी के अनुसार शहर के शिवगंज वार्ड 7 निवासी दुनीलाल पासवान के 38 वर्षीय पुत्र चन्दन पासवान को शनिवार की दोपहर अचानक सांस लेने में तकलीफ होने लगी, जिसके बाद परिजनों और स्थानीय युवा समाजसेवी हिमांशु चैरसिया ने एम्बुलेंस के लिए अस्पताल में फोन पर फोन करते रहे, लेकिन आधे घंटे तक अस्पतालकर्मियों द्वारा किसी तर का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आनन-फानन में मरीज के बेटे, पत्नी और आसप़ास के लोग ठेले पर से लादकर अस्पताल इलाज के लिए पहुंचे। जहां डाॅक्टर और अस्पतालकर्मी मरीज को बिना देखे ही बेतिया रेफर करने की फिराक में थे, लेकिन सन्नी चैरसिया, पार्षद भोला शर्मा तथा कुछ लोगों की पहल पर इसका इलाज शुरू हुआ और आॅक्सीजन लगाया गया। बताया गया कि मरीज का आॅक्सीजन लेबल 44 पर आ गया था, जहां आॅक्सीजन स्पोर्ट मिलने के बाद आॅक्सीजन लेबल 88 पर आया। स्थानीय लोगों ने कहा कि यह तो स्थिति पूरे बिहार का बना हुआ है। बिहार के स्वास्थ्य सेवा ठेले पर आ गया है। केंद्र और राज्य मंे बैठे सरकार को इसकी चिंता नहीं है। बल्कि सत्ता में कैसे बने रहे सिर्फ इसकी चिंता बनी हुई है।